
कहते हैं एक शादी तबतक पूरी नही होती, जबतक फेरे न हों …
लेकिन क्योंकि उन फेरों के वक़्त एक पत्नी अपने पति से सात वचन लेती है और सात शर्त रखती है पत्नी बनने की, मैं इस रस्म को अमान्य करती हूँ।
आज मैंने अग्नि देव के सामने बैठकर बिना किसी वचन और शर्त रखे, आपके साथ सात फेरे लिए और आपको अपने पतिदेव स्वीकारा एक बार फिर से, मन ही मन।
सिर्फ एक इरादे से…
अग्नि देव के पवित्र अग्नि के सामने हमारे पवित्र रिश्ते को और मजबूती देने के लिए।।
और ऐसा कर लेने के बाद मैंने पढ़ा क्या क्या मतलब होता है उन फेरों का… ☺
पहला वचन : यदि आप कभी किसी तीर्थयात्रा पर जाएं तो मुझे भी अपने साथ लेकर चलेंगें, व्रत-उपवास या फिर अन्य धार्मिक कार्य करें तो उसमें मेरी भी सहभागिता हो और जिस प्रकार आज आप मुझे अपने वाम अंग बैठा रहे हैं उस दिन भी आपके वाम अंग मुझे स्थान मिले। यदि यह आपको स्वीकार है तो मैं आपेक बांयी और आने को तैयार हूं।
मेरे वचन : आप बाध्य नही हैं मुझे किसी भी तीर्थयात्रा, व्रत उपवास या फिर अन्य धार्मिक कार्यों में मुझे सहभागी बनाने को। मुझे अपनी जिंदगी में कोई स्थान दें या न दें, फ़िर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
दूसरा वचन : जैसे आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी तरह मेरे माता-पिता भी आपके माता-पिता होंगें अर्थात अपने माता-पिता की तरह ही आप मेरे माता-पिता का सम्मान करेंगें और मेरे परिवार की मर्यादानुसार धर्मानुष्ठान कर ईश्वर को मानते रहें तो मैं आपके वामांग आने को तैयार हूं।
मेरे वचन : आप मेरे माता पिता के लिए कुछ भी करने के लिए बाध्य नही हैं। सबके माता पिता के प्रति आपके मन मे जो आदर और सम्मान रहता है, उससे मैं परिचित हूँ। इसीलिए आपसे विवाह का ये दूसरा वचन लिए बगैर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
तीसरा वचन : यदि आप युवा, प्रौढ़ और वृद्धावस्था यानि जीवन भर मेरा ध्यान रखेंगें, मेरा पालन करते रहेंगें यदि आपको यह मंजूर है तो मैं आपके वामांग आना स्वीकार करती हूं।
मेरे वचन : आप मेरा ध्यान रखने या मेरा पालन करने के लिए बाध्य नही हैं। आप अपनी इक्षा अनुसार हर कुछ कर सकते हैं। इसीलिए आपसे विवाह का ये तीसरा वचन लिए बगैर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
चौथा वचन : अपने चौथे वचन में कन्या इसी का अहसास दिलाती है कि विवाहोपरांत आप जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते और भविष्य में परिवार की सभी जरुरतों को पूरा करने का दायित्व आप पर रहेगा। यदि आप इसके लिये सक्षम हैं तो मैं आपके वामांग आने के लिये तैयार हूं।
मेरे वचन : आप मेरी जिम्मेदारियों से एकदम आज़ाद हैं। आज या भविष्य में भी कभी मेरे परिवार की किसी जरूरतों को पूरा करना आपके दायित्वों में नही रहेगा। आप पूरी तरह असक्षम हैं इन जिम्मेदारियों के लिए, तो भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
पांचवां वचन : अपने इस पांचवे वचन में कन्या वर से मांग करती है किसी भी प्रकार के कार्य, लेन-देन आदि में खर्च करते समय मुझसे सलाह-मशविरा जरुर करेंगें। यदि मंजूर है तो मैं भी आपके बांयी और आने को तैयार हूं।
मेरे वचन : आपके हर फैसले पे मुझे पूरा भरोसा है। आप अपने जीवन मे कोई भी कार्य, लेन देन आदि में खर्च जैसे भी करें, मेरी मंजूरी हैं। मुझसे सलाह-मशविरा के लिए आप बाध्य नही हैं। आपसे पाँचवा वचन लिए बगैर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
छठा वचन : अपनी छठी शर्त में कन्या वर से कहती है यदि वह अपनी सहेलियों, स्त्रियों, परिवार या आस पास अन्य कोई मौजूद हो तो सबके सामने उसका कभी भी अपमान नहीं करेंगें और दुर्व्यसनों (बुरी आदतें जैसे कि शराब, जुआ इत्यादि) से दूर रहेंगें। यदि मेरी यह शर्त आपको मंजूर है तो मैं आपके बांयी और आने को तैयार हूं।
मेरे वचन : आप मेरे साथ किसी के भी सामने जैसा आपका मन करे वैसा बर्ताव करें। कोई बंदिश नही है आप पर। बल्कि पूरा हक़ है आपका मुझपर। लेकिन बुरी आदतें शराब, जुआ इत्यादि करने से जरूर मना करूँगी क्योंकि इससे आपकी सेहत बिगड़ेगी। गलत रास्ते पे जाने से रोकना मेरा फ़र्ज है। पर आप जैसे रहना पसंद करेंगे और मुझे जैसे रखेंगे, मैं वैसे ढाल लुंगी खुद को। और फिर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
सातवां वचन : यह कन्या का अंतिम वचन है जिसे वह वर से मांगती है इसमें वह कहती है कि दूसरी स्त्रियों को आप माता समान समझेंगें अर्थात पति-पत्नि के रुप में हमारा जो प्रेम संबंध विकसित हुआ है इसमें किसी और को भागीदार नहीं बनाएंगें। यदि आपको मेरा यह वचन स्वीकार है तो ही मैं आपके वामांग आ सकती हूं।
मेरे वचन : आपके प्यार पर सबका हक़ है। जिसको प्यार करना चाहें आप, पूरी छूट है। आपसे सातवाँ वचन लिए बगैर भी मैं आपकी हूँ और हर जनम में आपकी रहूँगी।
हर हाल और हर परिस्थितियों में मैं आपको अपने पतिदेवजी का दर्जा देती हूं और आपकी पत्नी बनना मान्य करती हूं।।
मैंने आपको बिना किसी शर्त, बिना किसी वचन के, अपना अर्धांग का दर्जा उसी दिन मान लिया था, जिस दिन आपने बस इतना ही मुझसे कहा था “Marry me” 😊
आपने मुझसे उस वक़्त ऐसा सिर्फ इसीलिए कहा था क्योंकि आप मुझे उदास रहने देना नही चाहते थे। आप खुद की कुर्बानी मेरी खुशियों के लिए देना चाहते थे….
लेकिन एक बात कहूँ..
मुझे आपका ही इंतज़ार था कबसे… जितने रिश्ते आये मेरे लिए, सबमे मैं आपको ही ढूंढती रही हमेशा। यानी एक ऐसे इंसान को जोकि मुझे हर हाल में अपनाने को तैयार हो.!! ☺😊
और आप मेरे सामने आ ही गए न…. 😊
आप किसी के लिए भी बने हों,
पर मैं सिर्फ आपके लिये ही बनी हूँ।
अपनाइए या ठुकराइये परवाह नही,
मैं हर जनम सिर्फ आपकी हूँ।।